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नवजात शिशॠबà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥â€à¤Ÿ मिलà¥â€à¤• यानी मां के दूध को आसानी से पचा लेते हैं और इसे पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक रेचक (पेट साफ करने वाला) à¤à¥€ कहा जाता है। इस वजह से शिशà¥à¤“ं में कबà¥â€à¤œ की समसà¥â€à¤¯à¤¾ कम देखी जाती है लेकिन à¤à¤¸à¤¾ बिलà¥â€à¤•à¥à¤² नहीं है कि शिशॠमें कबà¥â€à¤œ होती ही नहीं है। फॉरà¥à¤®à¥‚ला मिलà¥â€à¤• लेने वाले बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ में दसà¥â€à¤¤ और कबà¥â€à¤œ होना आम समसà¥â€à¤¯à¤¾ है।
अगर आपके शिशॠको कबà¥â€à¤œ हो गई है तो जाहिर सी बात है कि ये उसके सà¥â€à¤µà¤¾à¤¸à¥â€à¤¥à¥â€à¤¯ के लिठठीक नहीं होगा और इतने छोटे बचà¥â€à¤šà¥‡ को बार-बार दवा देना à¤à¥€ सही नहीं है। à¤à¤¸à¥‡ में आप नवजात शिशॠमें कबà¥â€à¤œ का इलाज घरेलू नà¥à¤¸à¥â€à¤–ों से कर सकते हैं।
à¤à¤•à¥â€à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ
मूवमेंट करने से शिशॠकी मल तà¥â€à¤¯à¤¾à¤— की कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ वयसà¥â€à¤•ों की तरह ही उतà¥à¤¤à¥‡à¤œà¤¿à¤¤ होती है। शिशॠके पैरों को हलà¥â€à¤•े से हिलाà¤à¤‚। आप उसके पैरों को साइकिल के मोशन में à¤à¥€ चला सकते हैं। कबà¥â€à¤œ से राहत पाने का ये सबसे आसान तरीका है।
​सेब का रस
बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ में à¤à¥€ फाइबर की कमी के कारण कबà¥â€à¤œ हो सकती है। सेब में मौजूद घà¥à¤²à¤¨à¤¶à¥€à¤² फाइबर याâ€à¤¨à¥€ पेकà¥à¤Ÿà¤¿à¤¨ कबà¥â€à¤œ के इलाज में लाà¤à¤•ारी होता है। आप सेब के छिलके साथ जूस निकाल कर शिशॠको दे सकती हैं। दिन में दूध की बोतल में à¤à¤• बार सेब का रस पिलाने से कबà¥â€à¤œ ठीक हो जाता है।
​गरà¥à¤® पानी से नहलाना
गरà¥à¤® पानी से नहाने से शिशॠके पेट की मांसपेशियों को आराम मिलता है और उनमें आ रहे तनाव में कमी आती है। ये कबà¥â€à¤œ के कारण हो रही असहजता को à¤à¥€ दूर करता है।
​ऑरà¥à¤—ेनिक नारियल तेल
कबà¥â€à¤œ के घरेलू उपाय में नारियल तेल का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— à¤à¥€ किया जा सकता है। 6 महीने से अधिक उमà¥à¤° के शिशॠके खाने में दो या तीन मि.ली नारियल तेल मिला सकते हैं। अगर बचà¥â€à¤šà¤¾ 6 महीने सेकम है तो उसकी गà¥à¤¦à¤¾ के आसपास नारियल तेल लगाà¤à¤‚।
​टमाटर
6 महीने से अधिक उमà¥à¤° के बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ में कबà¥â€à¤œ से राहत दिलाने में टमाटर à¤à¥€ बहà¥à¤¤ फायदेमंद होते हैं। आप टमाटर का रस दे सकती हैं। à¤à¤• छोटे टमाटर को à¤à¤• कप पानी में उबाल लें और इसे ठंडा कर के छानने के बाद इस रस की शिशॠको रोज तीन से चार चमà¥â€à¤®à¤š पिलाà¤à¤‚।
पाचन संबंधित समसà¥â€à¤¯à¤¾à¤“ं के इलाज में बहà¥à¤¤ असरकारी होती है। à¤à¤• चमà¥â€à¤®à¤š सौंफ को à¤à¤• कप पानी में उबालने के बाद ठंंडा कर के छान लें और दिन में तीन से चार बार शिशॠको चमà¥â€à¤®à¤š से ये काढ़ा पिलाà¤à¤‚। अगर शिशà¥à¥ 6 महीने से कम है तो मां दिन में बार सौंफ खाà¤à¥¤
पपीता
फाइबर का अचà¥â€à¤›à¤¾ सà¥à¤°à¥‹à¤¤ है और इसीलिठये कबà¥â€à¤œ के इलाज में बहà¥à¤¤ असरकारी होता है। 6 महीने से अधिक उमà¥à¤° के बचà¥â€à¤šà¥‡ के लिठपपीता कबà¥â€à¤œ से छà¥à¤Ÿà¤•ारा दिलाने में बहà¥à¤¤ फायदेमंद है।
​तरल पदारà¥à¤¥
शरीर में पानी की कमी के कारण à¤à¥€ कबà¥â€à¤œ हो जाती है। 6 महीने से अधिक उमà¥à¤° के बचà¥â€à¤šà¥‡ के आहार में पà¥à¤°à¤šà¥à¤°à¤¤à¤¾ में तरल पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ को शामिल करें। सूप, फलों का रस, दूध और पानी से इसकी पूरà¥à¤¤à¤¿ कर सकते हैं।
​मालिश
पेट और पेट के निचले हिसà¥â€à¤¸à¥‡ की हलà¥â€à¤•ी मालिश करने से à¤à¥€ कबà¥â€à¤œ दूर हो सकती है। दिन में कई बार शिशॠकी मालिश करें।
​पà¥â€à¤¯à¥‚री वाला खाना
यदि 6 महीने से बड़ा बचà¥â€à¤šà¤¾ ठोस आहार नहीं ले रहा है तो उसे खाना तरी के रूप में दें। फल और सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में खूब फाइबर होता है जो कबà¥â€à¤œ दूर करता है। आप फल और सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को पीसकर तरीदार बनाकर दें।
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